13 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: शनिश्चरी अमावस्या पर साथ मनेंगे शनि जयंती और वट सावित्री व्रत, छत्तीसगढ़ के मंदिरों में बढ़ी तैयारियां

रायपुर। इस बार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास संयोग बनने जा रहा है। करीब 13 साल बाद ऐसा अवसर आया है, जब शनिश्चरी अमावस्या के दिन ही Shani Jayanti और Vat Savitri Vrat एक साथ मनाए जाएंगे। इस दुर्लभ योग को लेकर Chhattisgarh समेत पूरे देश में श्रद्धालुओं के बीच खास उत्साह देखा जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या के दिन भगवान Shani Dev की पूजा-अर्चना, दान और जप का विशेष महत्व माना जाता है। शनि जयंती के अवसर पर श्रद्धालु शनि मंदिरों में पहुंचकर तेल अर्पित करेंगे और जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति की कामना करेंगे।

वहीं सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री व्रत रखेंगी। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुख-शांति की प्रार्थना करेंगी। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और अन्य शहरों के प्रमुख शनि मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मंदिर समितियों की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। कई स्थानों पर सुबह से ही तेलाभिषेक, हवन और दान-पुण्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दुर्लभ संयोग में स्नान, दान और पूजा-पाठ का कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि पूजा के दौरान नियमों का पालन करें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतें।