सोना खरीदने से बचने की अपील पर उठे सवाल: सरकार खुद क्यों बढ़ा रही गोल्ड रिजर्व, जानिए पूरा मामला
नई दिल्ली। देश में सोने की बढ़ती कीमतों और आर्थिक दबाव के बीच लोगों से एक साल तक सोना कम खरीदने या खरीदारी टालने की चर्चाओं ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आम लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार सोना खरीदने से बचने की सलाह दे रही है, तो दूसरी तरफ सरकारी तिजोरियों में लगातार गोल्ड रिजर्व क्यों बढ़ाया जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। बड़ी मात्रा में सोना आयात होने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और व्यापार घाटा भी प्रभावित होता है। यही वजह है कि सरकार अक्सर लोगों को जरूरत से ज्यादा सोना खरीदने से बचने की सलाह देती रही है।
वहीं दूसरी ओर, Reserve Bank of India और अन्य केंद्रीय संस्थाएं रणनीतिक तौर पर सोना खरीदती हैं। जानकारों का कहना है कि केंद्रीय बैंक द्वारा खरीदा गया सोना देश की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आम जनता की ज्वेलरी खरीद और सरकार के गोल्ड रिजर्व में बड़ा फर्क होता है। जहां निजी खरीद से आयात बढ़ता है, वहीं सरकारी रिजर्व आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करते हैं।
हालांकि, इस तरह की किसी औपचारिक अपील को लेकर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सोने की कीमतों और आर्थिक हालात को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।





