सुकमा। जिले में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन के साथ विद्युत व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में बिजली के खंभे और लाइनें पानी में घिर गई हैं। इन विषम परिस्थितियों के बावजूद विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर बिजली व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने में जुटे हुए हैं।

कई स्थानों पर विद्युतकर्मी नाव के जरिए प्रभावित इलाकों तक पहुंच रहे हैं। कुछ जगहों पर बिजली के खंभे और कंडक्टर तक बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। विभाग के अनुसार, 33 केवी छिंदगढ़ और पुषपाल लाइन के कुछ हिस्सों में पानी भरने के कारण कंडक्टर पानी की चपेट में आ गए हैं।


33 केवी, 11 केवी और एलटी लाइनों की सुरक्षा बड़ी चुनौती

बाढ़ के कारण जिले के कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। ऐसे में विद्युत विभाग के सामने 33 केवी, 11 केवी और एलटी लाइनों को सुरक्षित रखने के साथ बिजली आपूर्ति को यथासंभव सुचारू बनाए रखने की चुनौती है।

इसके बावजूद विभागीय अधिकारी और मैदानी कर्मचारी लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं। जहां भी तकनीकी खराबी या विद्युत लाइन से खतरा नजर आ रहा है, वहां तुरंत आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।


छिंदगढ़, सुकमा और कोंटा में कई लाइनें पानी से घिरीं

छिंदगढ़ ब्लॉक के साथ सुकमा और कोंटा क्षेत्र में कई स्थानों पर विद्युत लाइनें और अन्य बिजली अधोसंरचना बाढ़ के पानी से घिरी हुई हैं। टीम लगातार ऐसे इलाकों का निरीक्षण कर रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

जिन क्षेत्रों में खतरा अधिक है, वहां विद्युत आपूर्ति और लाइन की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की जा रही है।


जोखिम के बीच जारी पेट्रोलिंग और सुधार कार्य

आपदा के दौरान एक असिस्टेंट इंजीनियर, तीन जूनियर इंजीनियर सहित दर्जनों विद्युत कर्मचारी अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात हैं। कई स्थानों तक पहुंचने के लिए कर्मचारियों को पानी, तेज बहाव और दुर्गम रास्तों से गुजरना पड़ रहा है।

विद्युत लाइनों की स्थिति का जायजा लेने के साथ जरूरी मरम्मत और पेट्रोलिंग का काम भी जारी है। विभाग की कोशिश है कि किसी भी संभावित हादसे को रोका जा सके और आवश्यक सेवाओं के लिए बिजली व्यवस्था सुरक्षित बनी रहे।


अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर कर रहे निगरानी

बाढ़ की स्थिति में मैदानी कर्मचारियों की जिम्मेदारी सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ गई है। लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ क्षतिग्रस्त लाइनों, खंभों और उपकरणों की समय रहते पहचान करना भी जरूरी है।

इसी वजह से विभागीय अधिकारी भी प्रभावित इलाकों में पहुंचकर कर्मचारियों के साथ हालात की निगरानी कर रहे हैं।


करंट के खतरे को देखते हुए बरती जा रही विशेष सावधानी

बाढ़ के दौरान विद्युत लाइनों और उपकरणों के आसपास पानी भरने से करंट फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण मरम्मत और निरीक्षण के दौरान विशेष सावधानी बरती जा रही है।

विद्युत व्यवस्था अस्पताल, पेयजल, संचार और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में कठिन परिस्थितियों के बीच विद्युतकर्मियों की लगातार तैनाती से आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने में मदद मिल रही है।


बाढ़ के बीच सेवा और जिम्मेदारी की मिसाल

जब भारी बारिश और बाढ़ के कारण लोग सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं, तब विद्युत विभाग के कर्मचारी प्रभावित इलाकों में पहुंचकर बिजली व्यवस्था की निगरानी और सुरक्षा में जुटे हैं।

सैकड़ों किलोमीटर लंबी विद्युत लाइनों की निगरानी और सुधार का यह अभियान आपदा के समय विभागीय कर्मचारियों की जिम्मेदारी, सतर्कता और सेवा भावना को दर्शाता है।