सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पंचायत के निर्माण कार्यों में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। मैनपाट जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नर्मदापुर में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत कराए गए कार्यों की जांच में 92 लाख 92 हजार रुपये से अधिक की राशि से जुड़ी अनियमितता सामने आने की बात कही गई है।
मामले में जनपद पंचायत मैनपाट ने सख्त रुख अपनाते हुए दो पूर्व सरपंच, एक वर्तमान सरपंच और दो तत्कालीन पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण के साथ खर्च और निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा गया है।
निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में संबंधित राशि की वसूली के लिए RRC (राजस्व वसूली प्रमाणपत्र) की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
सरकारी योजनाओं के निर्माण कार्यों की जांच में सामने आया मामला
मामला ग्राम पंचायत नर्मदापुर में अलग-अलग वर्षों में कराए गए विकास और निर्माण कार्यों से जुड़ा है। शिकायत मिलने के बाद पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड और निर्माण कार्यों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई।
इसमें मूलभूत मद, 15वें वित्त आयोग और स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के तहत खर्च की गई राशि और निर्माण कार्यों के रिकॉर्ड की पड़ताल की गई।
जांच के दौरान कई आवश्यक अभिलेख, व्यय प्रमाणक और निर्माण कार्यों के मूल्यांकन एवं सत्यापन से संबंधित फाइलें उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके कारण संबंधित राशि के उपयोग का सत्यापन नहीं किया जा सका।
सरपंच और सचिवों से मांगे गए दस्तावेज
जनपद पंचायत के सीईओ की ओर से संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्हें संबंधित वित्तीय वर्षों के सभी व्यय प्रमाणक, निर्माण कार्यों के मूल्यांकन और सत्यापन से संबंधित फाइलों तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है।
प्रशासन अब इन दस्तावेजों के आधार पर यह तय करेगा कि सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित कार्यों के लिए किया गया या नहीं।
जवाब नहीं दिया तो शुरू हो सकती है वसूली
जारी नोटिस में चेतावनी दी गई है कि संबंधित व्यक्ति उपस्थित होकर संतोषजनक जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता मानते हुए आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इसके बाद संबंधित राशि की वसूली के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, सीतापुर को RRC प्रकरण दर्ज करने के लिए पत्र भेजे जाने की बात कही गई है।
किससे कितनी राशि वसूली योग्य बताई गई?
सामने आए विवरण के मुताबिक अलग-अलग वित्तीय वर्षों में राशि को लेकर जिम्मेदारी तय की गई है।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में करीब 5 लाख 11 हजार रुपये की राशि पूर्व सरपंच गणेश नाग और तत्कालीन सचिव अनिल यादव से वसूली योग्य बताई गई है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में तत्कालीन सचिव चंद्रपाल सिंह से करीब 8 लाख 13 हजार 665 रुपये की राशि वसूली योग्य बताई गई है।
वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में वर्तमान सरपंच ललिता भैंसा से करीब 7 लाख 88 हजार 739 रुपये की राशि वसूली योग्य पाई गई है।
सबसे बड़ी राशि तत्कालीन सरपंच राजनाथ भैंसा से संबंधित बताई गई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच उनसे करीब 66 लाख 67 हजार 945 रुपये की राशि वसूली योग्य बताई गई है।
इस तरह जांच में कुल मिलाकर 92 लाख 92 हजार रुपये से अधिक की राशि वसूली योग्य पाई गई है।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
जनपद पंचायत अधिकारियों के मुताबिक ग्राम पंचायत नर्मदापुर के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान सरकारी राशि के उपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
अभिलेखों के अभाव में संबंधित खर्च का सत्यापन नहीं हो सका, जिसके बाद जिम्मेदार लोगों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
अब जवाब और दस्तावेजों पर टिकी आगे की कार्रवाई
फिलहाल संबंधित पूर्व और वर्तमान सरपंच तथा तत्कालीन सचिवों को नोटिस जारी किया गया है। उनके जवाब और पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
यदि संबंधित राशि के खर्च को लेकर संतोषजनक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो प्रशासन वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। ऐसे में यह मामला सरगुजा जिले में पंचायत स्तर पर सरकारी राशि के उपयोग और वित्तीय जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बन गया है।




