तिल्दा-नेवरा के ग्राम चांपा में शासकीय जमीन के आवंटन को लेकर विवाद, पंचायत प्रतिनिधियों ने दस्तावेजों में गड़बड़ी का लगाया आरोप; कंपनी ने दी सफाई

रायपुर, 23 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में चारागाह और गौठान की जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत चांपा के ग्रामीणों ने राधे शक्ति स्पंज आयरन कंपनी पर शासकीय भूमि के आवंटन में अनियमितता का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित जमीन को कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर कंपनी के नाम आवंटित किया गया है। इस मामले में पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

चारागाह की जमीन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

ग्रामीणों के अनुसार, गांव की जिस जमीन का उपयोग मवेशियों के चरने और गौठान संबंधी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है, उसके औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटन पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया में पंचायत की सहमति और जरूरी दस्तावेजों से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया गया।

पंचायत प्रतिनिधियों ने सौंपा ज्ञापन

ग्राम पंचायत की सरपंच रामकली वर्मा, सचिव टेकराम वर्मा और पूर्व सरपंच सुरेश वर्मा सहित अन्य प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है। इसमें जमीन के राजस्व रिकॉर्ड, पंचायत प्रस्ताव, अनापत्ति प्रमाण पत्र और आवंटन आदेश की जांच कराने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए सभी संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है।

कांग्रेस नेता ने भी उठाए सवाल

मामले में कांग्रेस नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने भूमि आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गांव की सार्वजनिक उपयोग की जमीन को लेकर ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जिस जमीन का उपयोग गौठान के लिए किया जा रहा था, अब उसका कुछ हिस्सा औद्योगिक गतिविधियों के लिए आवंटित किए जाने की बात सामने आई है।

कंपनी ने आरोपों को किया खारिज

इधर, राधे शक्ति स्पंज आयरन कंपनी प्रबंधन ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। प्रबंधन का कहना है कि जमीन का आवंटन शासन की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ है और कंपनी ने किसी भी शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा नहीं किया है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जमीन आवंटन से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। किसी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

फिलहाल यह मामला ग्रामीणों और कंपनी प्रबंधन के परस्पर विरोधी दावों के बीच उलझा हुआ है। प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन आवंटन में नियमों का पालन हुआ है या नहीं।