नई दिल्ली/ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की हेडी क्वाच को रोमांचक गोल्डन स्कोर में हराकर इतिहास रच दिया।
अस्मिता डे का जन्म 22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया में हुआ। साधारण परिवार से आने वाली अस्मिता के पिता साइकिल मरम्मत का काम करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। शुरुआती दिनों में वह 800 मीटर दौड़ की खिलाड़ी थीं, लेकिन बाद में जूडो की ओर रुख किया और यहीं से उनके करियर की नई शुरुआत हुई।
अस्मिता वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के भोपाल क्षेत्रीय केंद्र में कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्हें टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) का भी समर्थन मिला, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारी को मजबूती मिली।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्मिता ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने 2023 जूनियर एशिया कप में स्वर्ण, 2023 एशियन ओपन में रजत और 2025 कासाब्लांका अफ्रीकन ओपन में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा उन्होंने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी कई स्वर्ण पदक जीते और 2023-24 जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन बनीं।
उनकी सफलता का सफर आसान नहीं रहा। वर्ष 2025 में उनके पिता का ब्रेन स्ट्रोक से निधन हो गया था। इस कठिन दौर के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत जारी रखी। स्वर्ण पदक जीतने के बाद भावुक अस्मिता ने अपनी जीत अपने दिवंगत पिता, कोच और देशवासियों को समर्पित की।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में यह स्वर्ण पदक केवल अस्मिता डे की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय जूडो के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत भी माना जा रहा है। उनकी इस सफलता ने देशभर के युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की नई प्रेरणा दी है।





