रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य स्तरीय सरकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार अब किसी भी राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति का गठन निर्धारित प्रक्रिया, प्रशासनिक स्वीकृति और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बिना नहीं किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य अनावश्यक समितियों पर रोक लगाना, फाइलों के लंबित रहने की समस्या खत्म करना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।


क्यों बदले गए नियम?

सरकार के अनुसार अब तक कई विभाग बिना स्पष्ट उद्देश्य और पर्याप्त जानकारी के समिति गठन के प्रस्ताव भेज देते थे। कई मामलों में समिति का कार्यक्षेत्र, गठन का औचित्य और सदस्यों की जिम्मेदारियां स्पष्ट नहीं होती थीं, जिससे फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती थीं। कई समितियों की कार्यप्रणाली और रिपोर्ट पर सवाल भी उठते रहे, जिससे शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते थे। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है।


अब GAD ही जारी करेगा गठन का आदेश

नई व्यवस्था के तहत राज्य स्तरीय किसी भी अंतर्विभागीय समिति के गठन का अंतिम आदेश केवल सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) जारी करेगा। संबंधित विभाग को पहले प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करनी होगी और समिति गठन का पूरा प्रस्ताव केवल ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से भेजना होगा। इसके अलावा समिति में कम से कम सचिव स्तर के अधिकारी की मौजूदगी भी अनिवार्य कर दी गई है।


मुख्यमंत्री की मंजूरी होगी अनिवार्य

यदि किसी समिति में अशासकीय (Non-Official) सदस्य को शामिल किया जाना है, तो इसके लिए मुख्यमंत्री की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी। वहीं समिति की संरचना, उद्देश्य और कार्यक्षेत्र को संबंधित विभागीय मंत्री से भी अनुमोदित कराना होगा। बिना निर्धारित प्रक्रिया के किसी बाहरी सदस्य की नियुक्ति नियमों का उल्लंघन मानी जाएगी।


हर प्रस्ताव में देना होगा पूरा विवरण

अब समिति गठन के प्रस्ताव के साथ विभागों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि समिति बनाने की आवश्यकता क्यों है और संबंधित कार्य विभागीय स्तर पर क्यों नहीं किया जा सकता। प्रस्ताव में निम्नलिखित जानकारी अनिवार्य होगी—

  • समिति गठन का उद्देश्य
  • अध्यक्ष एवं सदस्य सचिव का नाम
  • सभी सदस्यों की सूची
  • प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी
  • समिति के अधिकार और कार्यक्षेत्र
  • निर्णय लेने की सीमा

अधूरी या अस्पष्ट जानकारी वाले प्रस्तावों पर आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी।


जिला और संभाग स्तर पर अलग व्यवस्था

राज्य सरकार ने जिला और संभाग स्तर की समितियों के लिए अलग प्रक्रिया तय की है। अब ऐसे मामलों में प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित प्रशासनिक विभाग स्वयं अनुमोदन करेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर समितियों का गठन अधिक तेजी से हो सकेगा।


इन समितियों पर लागू नहीं होंगे नए नियम

GAD ने स्पष्ट किया है कि ये नई व्यवस्था निम्न संस्थाओं और समितियों पर लागू नहीं होगी—

  • बोर्ड
  • निगम
  • मंडल
  • प्राधिकरण
  • जांच समितियां
  • खरीद एवं वित्तीय समितियां

इनका गठन और अनुमोदन संबंधित विभाग अपने स्तर पर ही करेगा।


सरकार का उद्देश्य

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से समिति गठन में पारदर्शिता बढ़ेगी, अनावश्यक समितियों के गठन पर रोक लगेगी, प्रशासनिक प्रक्रियाएं तेज होंगी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। साथ ही राज्य स्तरीय समितियों के गठन पर सरकार की सीधी निगरानी भी सुनिश्चित होगी।