बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्वास्थ्य विभाग को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान विभाग विज्ञापन में निर्धारित शर्तों से अलग नई पात्रता या दस्तावेज संबंधी शर्तें लागू नहीं कर सकता। साथ ही, कोरोनाकाल में सेवाएं देने वाले अभ्यर्थी के 10 बोनस अंक काटने की कार्रवाई को मनमाना और अवैध बताते हुए उसे नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान रायपुर निवासी मोहम्मद हाशिम ने याचिका दायर कर बताया कि उसने मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट भर्ती के लिए आवेदन किया था। भर्ती प्रक्रिया के तहत कोविड-19 महामारी के दौरान दी गई सेवाओं के आधार पर उसे नियमानुसार 10 बोनस अंक प्रदान किए गए थे। इन अंकों के आधार पर उसकी मेरिट बनी और वह चयन के योग्य था।

हालांकि बाद में स्वास्थ्य विभाग ने कुछ अतिरिक्त दस्तावेजों और नई व्याख्याओं के आधार पर उसके बोनस अंक निरस्त कर दिए। विभाग की इस कार्रवाई के कारण वह चयन सूची से बाहर हो गया। इसके बाद अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और विभाग के निर्णय को चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पाया कि भर्ती विज्ञापन में जिन शर्तों का उल्लेख किया गया था, उनमें बाद में कोई नई शर्त जोड़ने का अधिकार विभाग को नहीं है। अदालत ने कहा कि अभ्यर्थियों का मूल्यांकन उसी आधार पर किया जाना चाहिए, जो शर्तें विज्ञापन जारी होने के समय लागू थीं। भर्ती प्रक्रिया के बीच नियमों या पात्रता मानकों में बदलाव करना प्राकृतिक न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।

जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विभाग द्वारा मोहम्मद हाशिम के 10 कोविड बोनस अंक हटाना उचित नहीं था। कोर्ट ने इसे मनमाना और कानून के अनुरूप न मानते हुए बोनस अंक बहाल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्वास्थ्य विभाग को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के 10 बोनस अंक पुनः जोड़े जाएं और संशोधित मेरिट के आधार पर उसे मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट पद पर नियुक्ति प्रदान की जाए। साथ ही विभाग को निर्देश दिया गया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 40 दिनों के भीतर नियुक्ति आदेश जारी कर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए।

हाईकोर्ट के इस फैसले को भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद विभाग मनमाने ढंग से नई शर्तें लागू कर अभ्यर्थियों के अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकता।